जन्म–मृत्यु रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1969 के प्रवृत्त होने के पश्चात् देश में जन्म–मृत्यु तथा मृत–जन्म का रजिस्ट्रीकरण अनिवार्य हो गया है। अधिनियम के अन्तर्गत केन्द्र तथा राज्य स्तर पर विभिन्न पदाधिकारियों का प्राविधान किया गया है।

भारत के महारजिस्ट्रार की नियुक्ति केन्द्र सरकार द्वारा अधिनियम के अन्तर्गत की जाती है तथा वे राज्यों तथा संघ राज्य क्षेत्रों में जन्मों और मृत्यओं के रजिस्ट्रीकरण और अधिनियम की कार्य विधि से सम्बन्धित मामलों में निर्देशन एवं मार्ग दर्शन करने वाले केन्द्रीय पदाधिकारी हैं। उन्हें विभिन्न राज्यों में अधिनियम की कार्य विधि के सम्बन्ध में केन्द्रीय सरकार को एक वार्षिक रिपोट प्रस्तुत करनी होती है।
अधिनियम के अन्तर्गत राज्य सरकार द्वारा नियुक्ति मुख्य रजिस्ट्रार अपने राज्य में अधिनियम के अन्तर्गत बनाये गये नियमों के प्राविधानों को लागू करने वाले मुख्य कार्यकारी पदाधिकारी तथा जन्म–मृत्यु आकड़ों के संकलन तथा सांख्यिकीय रिपोर्ट तैयार करने के उत्तरदायी है।
इस रजिस्ट्रेशन प्रणाली में रजिस्ट्रार के स्तर पर अधिक कागजी कार्यवाही होने के कारण रजिस्ट्रार द्वारा इस रजिस्ट्रेशन प्रणाली में रजिस्ट्रार के स्तर पर अधिक कागजी कार्यवाही होने के कारण रजिस्ट्रार द्वारा सांख्यिकीय प्रतिवेदन मुख्यालय भेजने पर कार्य प्रभावित होता था।